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Friday, January 22, 2010

सच है न ?


 कुछ   रिश्ते  बदलती  हवा  है  तो
कुछ  रिश्ते  रूह  की  नज्म 
कुछ  तो  ऐसा  है  जो  संग  चलता  है 
आज  भी  कल  भी  -यूँ  कहें  तो !
बदलती  फिजा  के  हर  रुख  के  साथ ...................
चलता  है  संग -संग 
जाने  क्यूँ??????????
क्यों  ?कुछ  तो  है 
जुड़ते   है  कदम  कुछ  ..............
नया  रचने  के  लिए 
मिलती  है  नजरें ..............
साथ  जीने  के  लिए 
जुड़ते  है  बंधन  ...
किसी को   अपना  कहने  के  लिए .........
अपना  जिसे  कुछ  बताने  में ..........
आँखे भर  आईं
मन  तलाशे उसे .............
जैसे  मीन  और  पानी 
सच  है  न  ?

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