क्या है ?सुलगती आहें! एक ऐसी आवाज जिसे न वक़्त मिला कि अपनी चुभते दर्द ,भरी आँखों के जज्बात को,टीसते, टभकते ,खीजते ,एहसास को बयां कर सके
क्या है ?सुलगती आहें! एक ऐसी आवाज जिसे न वक़्त मिला कि अपनी चुभते दर्द ,भरी आँखों के जज्बात को,टीसते, टभकते ,खीजते ,एहसास को बयां कर सके
Sunday, January 24, 2010
Saturday, January 23, 2010
चिराग
चले थे राह में तनहा..........
कि कही कभी मेरा आशियाँ मिलेगा ........
पल -पल बुना था सपना कि , कोई ,कहीं , मेरे इंतजार में होगा
राह चली उसके साये के साथ ..............
कि उसे ये एहसास न हो कि , वो एक क्षण के लिए भी अकेला है ...............
न उसे ये महसूस होता कि ..............
ये पलकें क्यों नम हैं
ये आँखें क्यों भरी हैं ..........
ये आवाज क्यों संजीदा हैं ............
जली रोटी का न दर्द जाना था ??????
अधपके चावल का न मर्म जाना था
रची हथेली का न ख्वाब जाना था ???????
साजो -सिंगर का न अरमान जाना था ,,,,,
फिर भी तकिये गीले कर -कर काटी है ,,,,,,,,,,,,,जिन्दगी
उसके रुख के इंतजार के लिए ..................
जानते हैं , ......................................
खुद जलके भी चिराग रौशनी ............
क्यों देता है ?????????????
क्यों देता है ?????????????
क्योंकि उसे प्यार है .................................
उजाले से आई ,चेहरे की हर खुशी से .............................
क्योकि जब मन जुड़ जाता है तो बस इंतजार ही एक आस राह जाती है ...........................
क्योकि जब मन जुड़ जाता है तो बस इंतजार ही एक आस राह जाती है ...........................
Friday, January 22, 2010
ख़ामोशी
ख़ामोशी वो है जो न शब्दों में बयां हो ...................
वो नजर की हया है ............
दिल में छुपा डर है ...........
चाह के भी न कहने की सजा है ...................
कहीं दर्द है ..............
तो कहीं आंसू .............
ये ख़ामोशी हमारी नहीं
वो जो हर रोज न चाह के भी ........
मजबूर है ..............
अपना सब कुछ लुटाने को
फिर भी तनहा है .................
कि ???????????????
काश कोई तो ,,,,,,,,,
कोई तो
हो
जो
मुझे समझे ..............
क्या मैं केवल ..............
अंकशायिनी हूँ ..................
वो पीड़ा की गठरी बनी .................
राह तकती है
मूक हो कर ......
निस्तब्ध नेत्रों की
वो नजर की हया है ............
दिल में छुपा डर है ...........
चाह के भी न कहने की सजा है ...................
कहीं दर्द है ..............
तो कहीं आंसू .............
ये ख़ामोशी हमारी नहीं
वो जो हर रोज न चाह के भी ........
मजबूर है ..............
अपना सब कुछ लुटाने को
फिर भी तनहा है .................
कि ???????????????
काश कोई तो ,,,,,,,,,
कोई तो
हो
जो
मुझे समझे ..............
क्या मैं केवल ..............
अंकशायिनी हूँ ..................
वो पीड़ा की गठरी बनी .................
राह तकती है
मूक हो कर ......
निस्तब्ध नेत्रों की
ये ख़ामोशी
चित्कारती है ..........
कभी तो समझो हम बेजुबानों का दर्द
....................
चित्कारती है ..........
कभी तो समझो हम बेजुबानों का दर्द
....................
ज़िन्दगी
जिन्दगी ने एक रोज पूछा
क्या हूँ मैं ???????????????
जानते हो ........
थोड़ा -थोड़ा
मैं बताती हूँ
जानते हो ........
थोड़ा -थोड़ा
मैं बताती हूँ
हंसी ,खुशी ,गम ,
बादल ,बिजली ,पानी
सृजन ,विकास ,संहार
अमराई की गूंज ....
कोयल की कूक ..........
भोर का खट्टापन .......
सावन की बारिश
मेहँदी की लाली ..........
चूड़ी की खनक
पायल की झनक ........
आँखों का इंतजार ................
गम में भी मुस्कुराने का नाम जिन्दगी
सच कहूँ तो .................
अपने मंजर की हकीकत
चाँद की चांदनी ..........
रिश्तों का एहसास .......
किसी का बनने की चाहत
किसीका ख्वाब
पल -पल जीने का नाम
जिन्दगी
उदास चेहरे में रंगत लाने का नाम
जिन्दगी
बिछड़ के भी पाने का नाम
जिन्दगी
अनमोल तोहफा प्रेम
को जीने का नाम
-रचने -बसने पगने का नाम जिन्दगी
मेरी नजर में ये है ज़िन्दगी
बादल ,बिजली ,पानी
सृजन ,विकास ,संहार
अमराई की गूंज ....
कोयल की कूक ..........
भोर का खट्टापन .......
सावन की बारिश
मेहँदी की लाली ..........
चूड़ी की खनक
पायल की झनक ........
आँखों का इंतजार ................
गम में भी मुस्कुराने का नाम जिन्दगी
सच कहूँ तो .................
अपने मंजर की हकीकत
चाँद की चांदनी ..........
रिश्तों का एहसास .......
किसी का बनने की चाहत
किसीका ख्वाब
पल -पल जीने का नाम
जिन्दगी
उदास चेहरे में रंगत लाने का नाम
जिन्दगी
बिछड़ के भी पाने का नाम
जिन्दगी
अनमोल तोहफा प्रेम
को जीने का नाम
-रचने -बसने पगने का नाम जिन्दगी
मेरी नजर में ये है ज़िन्दगी
रिश्ते
रिश्ते नब्ज हैं !!!!!!!!!!
उठते एहसास के
चलते नज्म के
पल -पल जीते जज्बात के
आँखों के दर्द के
खुशी के एहसास के
पलकों के साये हों या ----
पनपते अरमान की
हर चाहत ........
उनसे अरमान जुड़े हैं .......
संबंधों की कड़ी
बनाने का मीठा -
जज्बा है
जिन्दगी को नायाब बनाने और
सबको पिरोने का सूत्र है
माँ का सदियों से सजोया घरोंदा है
तो पिता की अनकही ख्वाहिश
लम्हें -लम्हें की
बुनी चादर है
वो साथ है तो
राह बन जाती
मंजिल पास होती है
उठते एहसास के
चलते नज्म के
पल -पल जीते जज्बात के
आँखों के दर्द के
खुशी के एहसास के
पलकों के साये हों या ----
पनपते अरमान की
हर चाहत ........
उनसे अरमान जुड़े हैं .......
संबंधों की कड़ी
बनाने का मीठा -
जज्बा है
जिन्दगी को नायाब बनाने और
सबको पिरोने का सूत्र है
माँ का सदियों से सजोया घरोंदा है
तो पिता की अनकही ख्वाहिश
लम्हें -लम्हें की
बुनी चादर है
वो साथ है तो
राह बन जाती
मंजिल पास होती है
इस भरी भीड़ में
साया हैं रिश्ते
बिना बोले
पहचानने की कवायद है
रिश्ते
रब का बनाया अनमोल तोहफा है
रिश्ते
भावना की लड़ी
संबंधो की पूजा है
रिश्ते
गढ़ता है
सोचता है इन्सान
रिश्ते
पर बनाता है
ऊपर वाला
चलते है हम -सब
संजोते हैं सिद्दत से
बढती दूरियां
आज जो है (समाज में बढती हननता)
वो क्यों ???????????
कि........
हम भूल जाते हैं .......
रिश्ते
इसलिए
जब तक है साँस
जियो हर रिश्ते को ........
तभी बनती है ,
पूरी होती है ......
एक मुकम्मल आशियां की
सच्ची तस्वीर
मेरी नजर में
ये है
रिश्ते !!!!!!!!!!!!!!
साया हैं रिश्ते
बिना बोले
पहचानने की कवायद है
रिश्ते
रब का बनाया अनमोल तोहफा है
रिश्ते
भावना की लड़ी
संबंधो की पूजा है
रिश्ते
गढ़ता है
सोचता है इन्सान
रिश्ते
पर बनाता है
ऊपर वाला
चलते है हम -सब
संजोते हैं सिद्दत से
बढती दूरियां
आज जो है (समाज में बढती हननता)
वो क्यों ???????????
कि........
हम भूल जाते हैं .......
रिश्ते
इसलिए
जब तक है साँस
जियो हर रिश्ते को ........
तभी बनती है ,
पूरी होती है ......
एक मुकम्मल आशियां की
सच्ची तस्वीर
मेरी नजर में
ये है
रिश्ते !!!!!!!!!!!!!!
सपने
मिलना और बिछड़ना नियति है
संगे दिल का तड़पना मज़बूरी है
बिछड़ के हर पल साथ रहना भी
जीने के लिए जरुरी है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
क्योंकि हर वक़्त वो नजर में है
दूर हो के भी करीब है
अश्क के हर पैमाने में है
रोली ,कुमकुम ,राग -रंग ,
सुख -दुःख ,दिवस -रैन ,
अमावस -चांदनी ,पूनम .
तीज -त्यौहार ,फ़िजा के हर नूर में
कदम की हर बुनियाद में
कलम की गति में !!!!!!!!!
मेरी छवि में !!!!!!!!!!!!!!
मेरे सपनो का संसार है ,
मेरी तमनाओं का रूप है ,
रब का भेजा नायब तोहफा है ,
अब तो बस उनका साया बनने की चाहत है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
संगे दिल का तड़पना मज़बूरी है
बिछड़ के हर पल साथ रहना भी
जीने के लिए जरुरी है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
क्योंकि हर वक़्त वो नजर में है
दूर हो के भी करीब है
अश्क के हर पैमाने में है
रोली ,कुमकुम ,राग -रंग ,
सुख -दुःख ,दिवस -रैन ,
अमावस -चांदनी ,पूनम .
तीज -त्यौहार ,फ़िजा के हर नूर में
कदम की हर बुनियाद में
कलम की गति में !!!!!!!!!
मेरी छवि में !!!!!!!!!!!!!!
मेरे सपनो का संसार है ,
मेरी तमनाओं का रूप है ,
रब का भेजा नायब तोहफा है ,
अब तो बस उनका साया बनने की चाहत है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
सच है न ?
कुछ रिश्ते बदलती हवा है तो
कुछ रिश्ते रूह की नज्म
कुछ तो ऐसा है जो संग चलता है
आज भी कल भी -यूँ कहें तो !
बदलती फिजा के हर रुख के साथ ...................
चलता है संग -संग
जाने क्यूँ??????????
क्यों ?कुछ तो है
जुड़ते है कदम कुछ ..............
नया रचने के लिए
मिलती है नजरें ..............
साथ जीने के लिए
जुड़ते है बंधन ...
किसी को अपना कहने के लिए .........
अपना जिसे कुछ बताने में ..........
आँखे भर आईं
मन तलाशे उसे .............
जैसे मीन और पानी
सच है न ?
यादें
कभी चले थे हम साथ-साथ
थामें रहते थे एक-दूसरे का हाथ
एक दूसरे के दिल थे इतने पास
कभी अलग होंगे
यह हमने सोचा ही नहीं था
वक्त गुज़रते-गु्ज़रते दूर होते गए
हम पाले रहे याद उनकी
उनके बिना लम्हें खालीपन के साथ
यूँ ही गुजरते रहे
कभी दिल भी इतनी दूर होंगे
यह हमने सोचा ही नहीं था
उनकी याद में हमें दिल में
चिराग उम्मीद के जगाये रखे
जब भी उनकी याद आयी
अधरों पर मुस्कान उभर आयी
हम अपने अँधेरों में भी
उनसे रोशनी उधार माँगें
यह हमने सोचा ही नहीं था
जो एक बार उनके
घर के बाहर रोशनी देखी
उस दिन कदम खिंच गए
वह अपनी खुशी में
वह हमें भूल जायेंगे
यह हमने कभी सोचा ही नहीं था
हमें देखकर भी उनके चेहरे पर
मुस्कान नहीं आयी
आखें थी उनकी पथराई
हम खड़े थे स्तब्ध
उनके मेहमानों की फेरहिस्त में
हमारा नाम नहीं था
पास थे हम, पर दूर रहा उनका हाथ
थामें रहते थे एक-दूसरे का हाथ
एक दूसरे के दिल थे इतने पास
कभी अलग होंगे
यह हमने सोचा ही नहीं था
वक्त गुज़रते-गु्ज़रते दूर होते गए
हम पाले रहे याद उनकी
उनके बिना लम्हें खालीपन के साथ
यूँ ही गुजरते रहे
कभी दिल भी इतनी दूर होंगे
यह हमने सोचा ही नहीं था
उनकी याद में हमें दिल में
चिराग उम्मीद के जगाये रखे
जब भी उनकी याद आयी
अधरों पर मुस्कान उभर आयी
हम अपने अँधेरों में भी
उनसे रोशनी उधार माँगें
यह हमने सोचा ही नहीं था
जो एक बार उनके
घर के बाहर रोशनी देखी
उस दिन कदम खिंच गए
वह अपनी खुशी में
वह हमें भूल जायेंगे
यह हमने कभी सोचा ही नहीं था
हमें देखकर भी उनके चेहरे पर
मुस्कान नहीं आयी
आखें थी उनकी पथराई
हम खड़े थे स्तब्ध
उनके मेहमानों की फेरहिस्त में
हमारा नाम नहीं था
पास थे हम, पर दूर रहा उनका हाथ
जज्बात
जाने क्यूँ वो साँसों की डोर टूटने नहीं देता
बस दो कदम और चलने का वास्ता देकर मुझे रुकने नहीं देता
बात कहता है वो मुझसे हँस हँस कर जी लेने की
अजीब शख्स है मुझको चैन से रोने नहीं देता
आज हौसला देता है मुझे चाँद सितारों को छू लेने का
वो प्यारा सा चेहरा मुझे टूटकर बिखरने नहीं देता
शायद जानता है वो भी इन आँखों में आंसुओ का सैलाब है
जाने क्यूँ फिर भी वो इन आंसुओ को गिरने नहीं देता
मुझसे कहता है , "मैं तो मर जाऊंगा तुम्हारे बिना "
मैं जिंदा हूँ अब तक के वो मुझे मरने नहीं देता
बस दो कदम और चलने का वास्ता देकर मुझे रुकने नहीं देता
बात कहता है वो मुझसे हँस हँस कर जी लेने की
अजीब शख्स है मुझको चैन से रोने नहीं देता
आज हौसला देता है मुझे चाँद सितारों को छू लेने का
वो प्यारा सा चेहरा मुझे टूटकर बिखरने नहीं देता
शायद जानता है वो भी इन आँखों में आंसुओ का सैलाब है
जाने क्यूँ फिर भी वो इन आंसुओ को गिरने नहीं देता
मुझसे कहता है , "मैं तो मर जाऊंगा तुम्हारे बिना "
मैं जिंदा हूँ अब तक के वो मुझे मरने नहीं देता
दस्तक
अरसों गढ़ा था जिसे ख्वाबों में
आज तड़के पलक खुली तो
सपने रूप गढ़ खड़े थे
तभी इक हवा के झोंके ने नींद की वो तसबी तोड़ी
दरवाजे पे आज वैसे किसी ख़ुशी ने
मानो दस्तक दी थी
इक ख़ामोशी , इक चुप्पी , इक सन्नाटा था
पता नहीं क्या था
कि अब बस खुद में ही लिपटे रहने को जी चाहता है
मंजर खो गया था
पर तलाश अब भी जारी थी
शायद ,
खुद को भी अब दिन में सपने देखने की आदत सी लग गयी है
कोरे कागज़ भी जज्बातों के बवंडर से भरे दिखते हैं
कभी न हो इतनी मोहब्बत कि तू खुद को खो दे
जब नशा इसके जाम का उतरेगा
तो ,न
वक़्त ही तेरा होगा , न तू खुद ही अपना होगा
ये नशा है जो कुछ भुलाता नहीं ,सब कुछ भुला देता है
जो उतरता है तो नमी भरी जिंदगी बेख़ौफ़ दे जाता है
पर दिल की हर कड़ी ने हर मोड़ पे अपनी दस्तक दी थी
एक दस्तक
जो कारवां बदल सकता था वो आशियाँ बदल सकता था
पर दिल की दस्तक के हाथों मजबूर थी मैं ..
दर्द भरी सीवन
दरख्तें भी पिघल जाती हैं,
मोहब्बत ऐसी खानगी है |
ये कौन सी मिटटी है ,
जो नम भी नहीं होती |
हर जंजीर की कसावट ,
अपनी वफ़ा की गुजर सुनती है |
हम ये सोच के तनहा हैं ,
कि कोई कड़ी तो मेरी भी होगी न |
पैरों के महावर किस्से कई सुनते हैं ,
काश कि कोई किस्सा मेरी नज्मों में भी होता |
चुभन भरे अंगों पर ,
मरहम के पैबंद लगाया न करो |
ये वो मवाद है,
जो पैबंद भी जख्म बन जाए |
हर दिन आस में इसी गुजरता है ,
कि कल की किरण मेरी होगी |
पर हर शाम दिन के
पिघलने की दास्ताँ सुनाती है |
सिवाए दर्द के मैंने उसे कुछ न दिया ,
वो सोचता है ......
पर ऐ जाने बत्तूर !
मैंने तो जब से जाना तुझे,
हर अक्स और ख्वाब को तुझे में ही समेट दिया |
वो आये पहलू में कि दामन खिल उठा ,
पर किस्सा वो उठा कि तह्बन भी नम हो उठा |
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