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Friday, January 22, 2010

जज्बात


जाने  क्यूँ  वो  साँसों  की  डोर  टूटने  नहीं  देता
बस  दो  कदम  और  चलने  का  वास्ता  देकर  मुझे  रुकने  नहीं  देता

बात  कहता  है  वो  मुझसे  हँस  हँस  कर  जी  लेने  की
अजीब  शख्स  है  मुझको  चैन  से  रोने  नहीं  देता

आज  हौसला  देता  है  मुझे  चाँद  सितारों  को  छू  लेने  का
वो  प्यारा  सा  चेहरा  मुझे  टूटकर  बिखरने  नहीं  देता

शायद  जानता  है  वो  भी  इन  आँखों  में  आंसुओ  का  सैलाब  है
जाने  क्यूँ  फिर  भी  वो  इन  आंसुओ  को  गिरने  नहीं  देता

मुझसे  कहता  है , "मैं  तो  मर  जाऊंगा  तुम्हारे  बिना "
मैं  जिंदा  हूँ  अब  तक  के  वो  मुझे  मरने  नहीं  देता 


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